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You searched for: creator:"प्रफुल्ल कोलख्यान"
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[texts]ढलती उम्र में मन की उठान - प्रफुल्ल कोलख्यान
अपनी भौतिक परिस्थतियों के कारण चाँद आसमान से हिल नहीं सकता और कुमुदनी आसमान में जा नहीं सकती! फिर? कुमुदनी के प्राण का अधार पानी चाँद की परछाई के लिए जगह बनाता है। यहीं प्रेम का मन भौतिक स्थिति...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan; hindi; प्रेम
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[texts]जल बीच मीन पियासी - प्रफुल्ल कोलख्यान
यह बिल्कुल निराधार आशंका नहीं है कि जिनके हित में आंतरिक उपनिवेश का बने रहना ही जरूरी था उन्हीं के हाथों में बाहरी उपनिवेश से मुक्ति के नेतृत्व का होना इस आत्मघात का प्रमुख कारण बना। तात्पर्...
Keywords: कोलख्यान; स्त्री-विमर्श; आलोचना; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]दबाव में महानगर उछाल में भूमिपुत्र - प्रफुल्ल कोलख्यान
जल, जमीन, जंगल और आजीविका से बेदखल लोग रोजगार की तलाश में चिंटियों की तरह कतार बाँधकर महानगर की ओर आते हैं। चिंटियों को दूसरी तरफ मोड़ने के दो उपाय हैं। पहला यह कि गुड़ को उस जगह से हटा दिया जाये...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; महानगर; kolkhyan; hindi
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[texts]कित पायेगा ठौर - प्रफुल्ल कोलख्यान
कित पायेगा ठौर
Keywords: कोलख्यान; कविता; हिंदी; ठौर; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]जी हाँ... मैं लिखता हूँ... दुख पर काबू पाने के लिए - प्रफुल्ल कोलख्यान
समग्र और वास्तविक दुख या सुख कभी भी व्यक्तिगत मामला नहीं हुआ करता है। दुख और सुख हमारे सामाजिक जीवन का ही व्यक्त्विगत सारांश होता है। दुख है कि आज भी जिधर अन्याय है, उधर ही शक्ति है; बल्कि यह कि ...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; दुख; kolkhyan; hindi
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[texts]पुराने अंतर्विरोधों की नई जटिलताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
क्षमता बढ़ने से `अंतर्निर्भरता' घटती है। अंतर्निर्भरता घटने से व्यक्ति के `नैतिक' होने की सामाजिक बाध्यता कम होती जाती है। विकास का समस्त `नैतिक-मूल्य' से विरत `क्षमता' से परिचालित होता है। क्ष...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; ग्रंथित; अंतर्विरोध; kolkhyan; hranthit
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[texts]जीवन के दिन-रैन का, कैसे लगे हिसाब - प्रफुल्ल कोलख्यान
कभी-कभी छोटी मछलियों को निगलना जितना आसान होता है उसे हजम करना उतना ही मुश्किल होता है। बहुराष्ट्रीय पूँजी की दुष्टताएँ अंतत: राष्ट्रीय पूँजी को विषाक्त बना देती हैं। दक्षिणपंथ का भूमंडलीक...
Keywords: कोलख्यान; कट्टरता; अरुण; आलोचना; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]गुजरात के गाँधी और अयोध्या के राम - प्रफुल्ल कोलख्यान
राम को अयोध्या और गाँधी को गुजरात में सीमित करना स्थानीयकरण की प्रक्रिया का ही प्रकार्य तो नहीं है! कहीं हम अपनी मासूमियत में राम और गाँधी जैसे जनता के चित्त-नायक के विसर्जन और बाजार के वित्त-...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]गुजरात का अंतर्पाठ ग्रंथित - प्रफुल्ल कोलख्यान
बाहरी और भीतरी गुलामी को कारगर तरीके से लाने की प्रयोगशाला पूरी विकासशील दुनिया बनाई जा रही है। आज यह गुजरात में दीख रहा है, कल किसी दूसरी जगह दिखेगा। इस प्रयोगशाला से चाहे जो निष्कर्ष निकले ''...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; गुजरात; ग्रंथित; kolkhyan; hindi; gujrat; granthit
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[texts]हमारा समय - प्रफुल्ल कोलख्यान
एक पूरी वयस्क भाषा मेंहमारा समयइस सवाल के सामने पड़ा हैजहाँ मौत की शर्त्त परजिंदगी हथियानी है
Keywords: कोलख्यान; कविता; हिंदी; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]एक आदमी के ज़िद की आंतरिक रिपोर्ट - प्रफुल्ल कोलख्यान
कथातीत कथ्य और संवेदनातीत समझ का प्रभावशील साहित्यिक महत्त्व बन नहीं पाता है। प्रगतिशील और प्रगतिरोधी शक्तियों के अंतर्द्वंद्व को सामने लाने के अपने रचनात्मक संकल्प तो हैं लेकिन, कथ्य के क...
Keywords: कोलख्यान; दूधनाथ; उपन्यास; आलोचना; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]गुजरात का अंतर्पाठ - प्रफुल्ल कोलख्यान
गुजरात की घटना का अंतर्पाठ यह है कि बाहरी और भीतरी शक्तियाँ मिलकर वैश्वीकरण के जाल में हमारी राष्ट्रीय संप्रभुता और हमारे जनतांत्रिक हक को फँसाना चाहती है। ‘बाँटो और राज करो’ के राजनीतिक सू...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; गुजरात; kolkhyan; hindi; gujrat
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[texts]त्यौहार का तर्क - प्रफुल्ल कोलख्यान
त्यौहार संघर्ष और संतोष, आकांक्षा और उपलब्धि की अंतराल-भूमि पर वह बाग बनकर आता है जहाँ मनुष्य अपनी पीठ पर से सुख-दुख समेत उपलब्धियों की गठरी को उतार कर अपनी आँख में सपनों के पुनर्भव होने के एहस...
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan; हिंदी
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[texts]अमन के सेतु पर अमन की बस- तमसो मा - प्रफुल्ल कोलख्यान
असल में सांप्रदायिकता एक ऐसी घातक वैयक्तिक मनोवृत्ति और सामाजिक प्रवृत्ति रही है जिसने दक्षिण एशिया के जन-जीवन को बिल्कुल तहस-नहस करके रख दिया है। सांप्रदायिकता के सवाल के सामने आते ही हम इत...
Keywords: कोलख्यान; तमस; भीष्म; kolkhyan; tamas; bhishm
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[texts]सोचो भैया, बहना सोचो - प्रफुल्ल कोलख्यान
न सोचा, बहते गये भाव में तो समझो डूबी नैया बिन पानी के, होगा कैसे बेड़ा पार।ढोल, नगाड़ा, कीर्तन, काला, सफेद और नीला, पीला सारे हैं, पर केवल शिष्टाचार।विपदा बड़ी भारी, थोड़ा भी सोच लिया तो देश को मिल...
Keywords: कोलख्यान; कविता; हिंदी; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]माँ का क्या होगा - प्रफुल्ल कोलख्यान
माँ का क्या होगा ?? लोभ की चपेट में फँसकर ऐसा समाज विकसित होता जा रहा है जिसमें न बूढों के लिए सच्चा आदर बचा है न बच्चों के लिए सच्चा स्नेह। ऐसा समाज न सिर्फ परंपराओं की अच्छाइयों से विमुख होता है...
Keywords: कोलख्यान; समाज; आलोचना; हिंदी; kolkhyan
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[texts]जरूरी है देश - प्रफुल्ल कोलख्यान
कोई ईश्वर नहीं, कोई धर्म नहीं, कोई ग्रंथ नहीं,कोई ज्ञान नहीं, कोई विज्ञान नहीं, कोई विवेक नहींजो एहसास करा सके आदमी को कि जब नैया डूबती हैतब बचते वे भी नहीं, जिनके पैर मेंखूबसूरत, चमकदार, कीमती जू...
Keywords: कोलख्यान; कविता; हिंदी; kolkhyan; kavita; hindi
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[texts]अस्मिता क्या और क्यों - प्रफुल्ल कोलख्यान
नव-सामाजिक आंदोलनों की खासियत यह है कि ये अस्मिता के सवाल को तो उठाते हैं, लेकिन उसके वर्गीय आधार को नकारते  हैं। बल्कि ये अपने को सामाजिक दायरे के नाम पर आर्थिक और राजनीतिक प्रसंग को अपने लिए ...
Keywords: कोलख्यान; अस्मिता; आलोचना; kolkhyan; hindi
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[texts]हिंसा पर टिकी सभ्यता - प्रफुल्ल कोलख्यान
नागार्जुन जैसे बड़े कवि कहते हैं कि प्रति-हिंसा ही उनके कवि का स्थायी भाव है। ऐसा कहने के पीछे कवि की वेदना है, इसे उल्लास की तरह नहीं पढ़ा जाना चाहिए। यह एक गहरी बात है। इसे फूंक मार कर उड़ा देन...
Keywords: कोलख्यान; हिंसा; सभ्यता; kolkhyan; hindi; हिंदी
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[texts]साहित्य का समाज शास्त्र - प्रफुल्ल कोलख्यान
‘मधुरी बानी’ बोलनेवाली उदारीकरण-निजीकरण-भूमंडलीकरण की वैश्विक प्रक्रिया के अंतर्गत विकसित ‘तिरगुन फाँस’ राष्ट्र और राज्यव्यवस्था की विफलताओं के हवाले से सभ्यता संररचना की मौलिक इकाई के ...
Keywords: कोलख्यान; आलोचना; साहित्य; समाज; शास्त्र; kolkhyan; hindi
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[texts]डर, जो बाहर भी है और भीतर भी - प्रफुल्ल कोलख्यान
डर एक संदेश भी है इन दिनों। डर का संदेश हो जाना इसलिए भी त्रासद है कि एक समय चित्त की भय-शून्यता की कामना विश्व कवि रवींद्रनाथ के ठाकुर के काव्य में उतरकर कोलकाता ही नहीं, बंगाल ही नहीं, भारत ही न...
Keywords: kolkhyan; hindi; कोलख्यान; निशांत; आलोचना
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[texts]सड़क का जायजा - प्रफुल्ल कोलख्यान
भूखे पेट सोकरसपनों का मजा लेने से बेहतरदीवार में सूराख करसड़क का जायजा लेना है।
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]धर्म, राज्य और समाज - प्रफुल्ल कोलख्यान
दर्शन में विचार तर्क समर्थित ज्ञान के गर्भ में विकसित होता है। साहित्य में विचार, विवेक समर्थित संवेदना के गर्भ में विकसित होता है। जीवन में ज्ञान की बहुत बड़ी महिमा है। समाज इस ज्ञान का आदर क...
Keywords: कोलख्यान; धर्म; राज्य; समाज; आलोचना; हिंदी; hindi; kolkhyan
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कविताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
वह कौन लगता हैहमारा आपका हम सबकाउसे किस भाषा में बतायें कि उसे प्यार करना चाहिएयह उसका देश है
Keywords: कोलख्यान; कविता; kolkhyan; kavita
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[texts]आँसू की छाया - प्रफुल्ल कोलख्यान
साहित्य के कमलवन में छिड़े गजग्राह युद्ध से बहुत दूर ऐसे संघर्षशील लोग कहीं भी मिल सकते हैं। गजग्राह युद्ध के बाहर यह पीपिलिका संघर्ष किसलिए जारी रहा करता है! क्या मिलता है? अभिव्यक्ति का सुख?...
Keywords: kolkhyan; Aasu ki chhaya; hindi; कोलख्यान; हिंदी; आँसू की छाया
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[texts]राष्ट्रीयता, नगरीयता और नागरिकता - प्रफुल्ल कोलख्यान
नागरिकता का संबंध संवैधानिक रूप से भले ही राष्ट्रीयता से पुष्ट और  परिभाषित होता हुआ दिखता रह सकता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से नागरिकता का संबंध निकृष्टतम अर्थों में नगरीयता से अपभाषित और स...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; राष्ट्रीयता; नगरीयता; नागरिकता; kolkhyan; hindi
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[texts]पर हित और पराई पीर - प्रफुल्ल कोलख्यान
 ‘सर्वभूतों’ को आत्मवत बतानेवाली संस्कृति में ‘पराई पीर’ और  ‘पर हित’ का ‘पर’ कौन है.. इस ‘पर’ की पहचान क्या है? किसी के ‘पर’ हो जाने की प्रक्रिया क्या है? तुलसीदास का संदर्भ लें तो जिसे राम-वैद...
Keywords: कोलख्यान; परहित; पराईपीर; kolkhyan; hindi
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[texts]देश में जनादेश का संदेश - प्रफुल्ल कोलख्यान
भारत में जनतंत्र बहुत लंबे संघर्ष के बाद स्थापित हुआ है। जनतांत्रिक व्यवस्था में जनादेश का बहुत महत्त्व होता है। जनादेश को समझने में हुई चूकों की भारी कीमत समाज को चुकानी पड़ती है। यह कीमत त...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; जनादेश; kolkhyan; hindi
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[texts]कुछ तो, बताओ मनोरमा - प्रफुल्ल कोलख्यान
सभ्यता ने उस मंदिर को `खुजराहो मंदिर' का नाम दिया था। पता नहीं सच है या झूठ है, लेकिन लोग कहते हैं कि उन्हीं पत्थरों में से किसी-न-किसी को मुहब्बत महल की हर नींव में डाला जाता रहा है। तब से अब तक कि...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]बच्चा उदास है - प्रफुल्ल कोलख्यान
बच्चा उदास है होशियार बच्चेतमीज दे रहे हैं किअपराध हैजाना इस खेल के खिलाफ
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]अपने मोर्चे पर मरने की जिद्द - प्रफुल्ल कोलख्यान
.... घर के बदले पहुँच गया अजायब घर। डेढ़ दो घंटे तक घूम-फिर कर देखने के बाद मन कुछ हल्का था। और था यह एहसास कि किन-किन मुश्किलों का सामना करते हुए, उन पर अपने ढंग की विजय हासिल करते हुए मनुष्य आज तक क...
Keywords: kolkhyan; hindi; कोलख्यान
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[texts]अंतिम क्षण में जनतंत्र - प्रफुल्ल कोलख्यान
बिना किसी आदर्श के, बिना किसी नायक के किसी सामाजिकता की गत्यात्मकाता में आत्मीयता का कोई प्रसंग नहीं जुड़ता है। इसका एक कारण यह है कि आदर्श और नायक से ही लोगों के मनोजगत का तादात्मीयकरण संभव ह...
Keywords: कोलख्यान; जनतंत्र; आलोचना; प्रेमचंद; रघुवीर; kolkhyan; hindi
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[texts]अस्मिता क्या और क्यों - प्रफुल्ल कोलख्यान
नव-सामाजिक आंदोलनों की खासियत यह है कि ये अस्मिता के सवाल को तो उठाते हैं, लेकिन उसके वर्गीय आधार को नकारते  हैं। बल्कि ये अपने को सामाजिक दायरे के नाम पर आर्थिक और राजनीतिक प्रसंग को अपने लिए ...
Keywords: कोलख्यान; अस्मिता; हिंदी; kolkhyan; alochana
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[texts]अभिप्राय और अर्थ - प्रफुल्ल कोलख्यान
डिब्बे के ऊपर की इबारत चाहे जो बताये गृहस्थ जानता है कि किस डिब्बे में चीनी है किस में नमक! क्षण-क्षण रीतते हुए शब्दों में गृहस्थी के काम लायक अर्थ सँजोने की चिंता करनी ही होगी। आजकल सामान का व्...
Keywords: कोलख्यान,हिंदी,hindi,kolkhyan
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[texts]साहित्य का समाज शास्त्र ग्रंथित - प्रफुल्ल कोलख्यान
 हम ‘गोदान’ की नींद में नहीं टहलते, गोदान के सपनों की अंतर्यात्रा बार-बार करते हैं;जितनी बार यह अंतर्यात्रा करते हैं, उतनी बार सपनों का पुनर्सृजन करते हैं। सपनों को नींद से अलगाना कितना कठिन ह...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; समाज; शास्त्र; समाजशास्त्र; आलोचना; kolkhyan; hindi
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[texts]कैसे कहूँ, कह नहीं सकता, क्यों गंधमादन रोज दस्तक देता है - प्रफुल्ल कोलख्यान
किसके होने से कच्चे सपनों की मादक महक मुझे दीवाना बना देती हैकिसकी तलाश में मेरे आकाश का चाँद बादलों में सारी रात भटकता हैकिसकी पुकार पर खुशगवार चाँदनी मेरी आँखों में नंगे पाँव टहलती हैकौन ह...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]इनकार का हक और हक का इनकार - प्रफुल्ल कोलख्यान
मकान बनाने की ललक बढ़ी है। घर बसाने की ईहा कम हुई है। तलाक की घटना की संख्या में चिंतनीय वृद्धि हुई है। इन्हें जीवन-यापन में स्थायित्व के अवसरों की कमी से भी जोड़कर देखा जा सकता है। ......
Keywords: कोलख्यान; नैतिक; आलोचना; kolkhyan; hindi
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[texts]हिंदू मुस्लिम रिश्तेः नया शोध, नए निष्कर्ष - प्रफुल्ल कोलख्यान
यह सच है कि सत्ता और मुनाफा के लिए राजनेता सांप्रदायिक हिंसा को उपकरण बनाने से नहीं चूकते हैं लेकिन सत्ता और मुनाफा तो आधुनिकता का नहीं पूँजीवाद का अदम्य मनोरथ है। पूँजीवाद के राष्ट्रवादी और...
Keywords: कोलख्यान; हिंदू; मुस्लिम; शोध; सांप्रदायिकता; वार्ष्णेय; kolkhyan; hindi
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[texts]जीने के लिए चाहिए सारे-के-सारे औजार - प्रफुल्ल कोलख्यान
कविता को चाहिए उदास जीवन के अंत:करण में बची हुई करुणा का अंतिम राग। कविता को चाहिए ग्लेशियर की आत्मा में सोई हुई आग की अंतिम लौ। कविता को चाहिए प्रथम और प्रथमा के अद्वैत प्रगाढ़ आलिंगन की पहली ...
Keywords: कोलख्यान; कविता; आलोचना; अनिमेष; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]नवनैतिकता के आयामः गमे रोजगार भी, गमे इश्क भी - प्रफुल्ल कोलख्यान
समरस, स्वत्वपूर्ण, स्वतंत्र और समतामूलक समाज के निर्माण के स्वप्न का सिराजा बिखरता जा रहा है। राजनीति हो या धर्म ही क्यों न हो उनके ढाँचों से मानवीय अंतर्वस्तु बहुत तेजी से कूच कर रही है। क्या...
Keywords: ग्रंथित; कोलख्यान; हिंदी; granthit; kolkhyan; hindi
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[texts]कुछ तो हक अदा हुआ - प्रफुल्ल कोलख्यान
मातृभाषा का अपना महत्त्व हुआ करता है। निश्चित रूप से इसे स्वीकार करना ही चाहिए। लेकिन राष्ट्रभाषाओं या राजभाषाओं का भी अपना महत्त्व हुआ करता है। राष्ट्रीय जीवन में इसकी अवहेलना नहीं की जा स...
Keywords: कोलख्यान; नागार्जुन; kolkhyan; nagarjun
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[texts]सांप्रदायिकता Link - प्रफुल्ल कोलख्यान
सांप्रदायिकता के बारे में 
Keywords: कोलख्यान.सांप्रदायिकता; kolkhyan
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[texts]अच्छा बदल रहा - प्रफुल्ल कोलख्यान
उदारीकरण, का उदार बदल रहाअच्छे दिन, का अच्छा बदल रहाअच्छे-अच्छों का अच्छा बदल रहा अच्छा तो राजधानी में टहल रहा
Keywords: कोलख्यान; हिंदू; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]पाठक और साहित्य - प्रफुल्ल कोलख्यान
सामाजिकता परस्पर-निर्भरता से ही संरक्षित हेती है। यह परस्पर-निर्भरता जितनी अमूर्त होती है सामाजिकता भी उसी आनुपात में अमूर्त होती जाती है। विज्ञान के विकास से मनुष्य और उसकी जीवन-चर्या के स...
Keywords: कोलख्यान; आलोचना; पाठक; kolkhyan; hindi
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[texts]आलोचना की संस्कृति - प्रफुल्ल कोलख्यान
जीवन-विवेक न उभय-निष्क्रियता की बात करता है और न निष्पक्षता का। ऐसा इसलिए कि विषम समाज अपनी निर्मिति में ही पक्षपातपूर्ण होता है। पक्षपातपूर्ण वातावरण में, निष्पक्षता चालू पक्षपातपूर्ण व्य...
Keywords: कोलख्यान; आलोचना; संस्कृति; kolkhyan; alochana; hindi
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[texts]दुःस्साध्य भाषिक कारीगरीः क़िस्सा कोताह - प्रफुल्ल कोलख्यान
जीवन में बदलाव की बयार बह रही है। साहित्य में इस बयार से एक नए तरह का वातावरण बन रहा है। विधाओं की परंपरागत सीमाएँ टूट रही हैं। इधर विधाओं के संदर्भ में यह सामान्य साहित्यिक प्रवृत्ति चलन में ...
Keywords: kolkhyan; hindi; कोलख्यान; राजेश; किस्सा; आलोचना
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[texts]ओ अनागत शिशु - प्रफुल्ल कोलख्यान
ओ अनागत शिशु
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]आख़िर इस दर्द की दवा क्या है - प्रफुल्ल कोलख्यान
आज भी भारत में `गोहाना' हो जाता है। यह `गोहाना' का हो जाना कोई एकल या अपवाद नहीं है। बदले हुए नाम-रूप से `गोहाना' प्रकट होता ही रहा है। भारतीय संस्कृति में दलित के प्रति सामाजिक सलूक का सलीका ऐसा फा...
Keywords: kolkhyan; hindi; कोलख्यान; संजीवखुदशाह; सफाईकामगार
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[texts]अति से क्षति - प्रफुल्ल कोलख्यान
सार्वजनिक सेवाओं का उपयोग करते हुए विशिष्टजनों का अपना काम करना सचमुच बहुत ही बांछनीय और प्रेरणाप्रद है,  लेकिन इससे इसका सर्वजन की सामान्य जीवन-स्थितियों पर कोई खास असर नहीं पड़ता है। आगे आ...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; आम; आदमी; पार्टी; आप; kolkhyan; hindi; aap
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[texts]रात की अंतिम गाड़ी के पीछे - प्रफुल्ल कोलख्यान
रात की अंतिम गाड़ी के पीछेरात की अंतिम गाड़ी के पीछे की भुकभुकाती लाल बत्ती जब धीरे-धीरेपुतलियों से ओझल होती जा रही हो ठीक उस समय कितना असहाय होता हैप्लेटफॉर्म पर खड़ा यात्री, स्तब्ध, बेचैन औ...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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